जब तेरे साथ चलता हूँ, सफ़र मंज़िल सा लगता है!
हो चाहे लाखो शोरॉगुल, सुकून सा मन को मिलता है!
बढ़ाना चाहता हूँ तेरे कदमो के संग कदम अपने,
मैं तेरे साथ चलने को ही मंज़िल समझता हूँ!
तुम ही तो लेकर आई थी प्यार आँखो में!
तेरी भोली मुस्कुराहट ने ही तो हँसना सिखाया है!
तेरी मीठी बातो ने ही तो लोगो को समझना सिखाया है!
मेने तो अपने खुदा से बढ़कर तुझको माना है!
तेरी याद आती है और मेरे आँसू बह निकलते है!
दिल में बस नाम तेरा है ये मेरे लब कह निकलते है!
तुझी को ही माँगा है मेने खुदा से अपनी झोली में!
दुआ मैं सिर जब झुकता है, मन्नतो में तुम होती हो!