Wednesday, 20 July 2011

Badha do haath tum apna....

जब भी खुदको तनहा समझता था, तू मेरे पास होती थी.
उन मुश्किल अंधेरो में भी, कमसकम आस होती थी.
लोगो का कहना है सफलता साथ अब चल रही मेरे.
मगर मै तो तेरे साथ चलने मे अपनी सफलता समझता हूँ. 

जुदाई मे जो झलकी थी तेरी तड़प अब भी कहती है,
बेवफाई की नहीं तुमने गवाही वो ये देती है.
तुझे रोके है वो जंजीरे, जिन्हें जुदा मे कर नहीं पाया.
क्यों तेरी मासूम मुस्कानों मे छुपा दर्द कभी मै सह नहीं पाया.

गुजारे साथ जो तेरे, सभी यादे सुनहरी थी.
वो ढलती शाम सतरंगी, वो कोमल सी दुपहरी थी.
लिखु मे किस कदर की अब दिन कट रहे कैसे.
ना कोई पल मेरा अब है, बस नीरस चारो पहरी है.

ये आँखे आज भी सपने सिर्फ तेरे ही संजोये है,
दिल की धडकनों मे गूंजता नाम सिर्फ और सिर्फ तेरा है,
तेरी बचकानी बाते सुनने को मन मेरा तड़पता है,
मेरी जिन बातो ने दिल दुखाया तेरे, उन बातो पर अब मेरा दिल सुबकता है.

इतना दूर चला आया, क्योकि संग तेरा सहारा था,
जो संभाले था इस टूटे कांच को वो सिर्फ तेरा दिलासा था,
जो भी आज हूँ मै वो तेरी दुआ का ही असर तो है,
जो पाया है वो तेरा है, जो पाउँगा वो तेरा है.

समझता हों तुम्हारा फैसला बदल नहीं सकता,
मगर इस फैसले के संग मै कभी आगे बढ़ नहीं सकता,
चुरा लूँगा तुम्हारी आँख से सभी बहते हुए मोती,
बढादो हाथ तुम अपना, बना लो तुम मुझे साथी.

4 comments:

  1. Great Sunil....What a dard bhari daastan...
    Liked it......
    Tu hi he aaj ka Shakespear he re......

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  2. bhai dile le liyaaa.fir vohi bat kahunga ki 1hli bar me hi shaandar likha hai.....Praying to GOD ki vo pad le ise...

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  3. Its a nice poetry and I wish that ur wish comes true wich is expressed frm dis poem.
    Nyways u can try out dis new proffesssion wid ur job.
    Main hamesha taiyaar hoon apna haath badane ke liye dude......donn worry

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